मंगलवार, 16 जनवरी 2018

59वीं नेशनल आर्ट एग्जीबिशन 18 जनवरी से

59वीं नेशनल आर्ट एग्जीबिशन 18 जनवरी से
मूमल नेटवर्क, दिल्ली। केन्द्रीय ललित कला अकादमी आयोजित 59वीं नेशनल आर्ट एग्जीबिशन का उद्घाटन 18 जनवरी को होगा। मुख्य अतिथि के रूप में आमन्त्रित भारत सरकार के संस्कृति मंत्री डॉ. महेश शर्मा प्रदर्शनी का उद्घाटन करेंगे। यह प्रदर्शनी रवीन्द्र भवन स्थित ललित कला दीर्घाओं में 10 फरवरी तक चलेगी।
उल्लेखनीय है कि इस वर्ष नेशनल अवार्ड के लिये चुने गए 15 आर्टिस्ट्स के साथ कुल 172 कलाकारों की 172 कृतियों का प्रदर्शन इस प्रदर्शनी में किया जाएगा।

सोमवार, 15 जनवरी 2018

10 फरवरी तक कर सकते हैं आवेदन

10 फरवरी तक कर सकते हैं आवेदन
केन्द्रीय ललित कला अकादमी स्कालरशिप के लिए
मूमल नेटवर्क, नई दिल्ली। ललित कला अकादमी द्वारा वर्ष 2018-19 के लिए स्कालरशिप आवेदन आमन्त्रित किये जा रहे हैं। 35 वर्ष तक की आयु के भारतीय कलाकार, कला आलोचक व कला इतिहासकार स्कालरशिप के लिए आवेदन कर सकते हैं। स्वीकृत आवेदकों को एक वर्ष के लिए अकादमी द्वारा प्रति माह 10,000 रुपये की स्कालरशिप राशि प्रदान की जाएगी। अकादमी कार्यालय में आवेदन भेजने की अन्तिम तिथि 10 फरवरी है।
मूमल के पास आवेदन पत्र व नियमावली उपलब्ध है।

रविवार, 14 जनवरी 2018

कृष्णा महावर के आर्ट परफॉरमेंस ने समां बांधा


कृष्णा महावर के आर्ट परफॉरमेंस ने समां बांधा
मूमल नेटवर्क, जयपुर। राजस्थान ललित कला अकादमी आयोजित 20वें कला मेले के चौथे दिन यानि आज शाम 5 बजे डॉ. कृष्णा महावार द्वारा प्रस्तुत आर्ट परफॉरमेंस ने समां बांध लिया।
आर्टिस्ट के शब्दों में यह परफॉरमेंस पूरी तरह से बॉडी द्वारा सेल्फ एक्सप्लोरेशन की और एक कदम है, यह नॉन लिनियर और अमूर्त परफॉरमेंस है। जिसका मूल विचार तो चित्र के छ तत्व है परंतु प्रक्रिया के दौरान कई बार उस विचार से आगे व परे की यात्रा भी हो जाती है। जो कि किसी भी सृजन प्रक्रिया में जायज भी है। एक रेखा किस प्रकार अपनी भौतिक सत्ता रखती है या टेक्सचर और रंगो की मुठभेड़ जब शरीरों से होने लगे तो क्या कुछ नई संभावनाएं निकल कर आती हैं। रिक्त स्थल की ऊर्जा को परोक्ष रूप में स्वयं कलाकार और साथ ही दर्शक भी एक साथ महसूस करने लगते है। इसे  मुमेंट्स, साउंड्स के साथ मूर्त- अमूर्तन, पॉजिटिव-नेगेटिव,  सृजन- विध्वंस के इर्द गिर्द गूंथा गया है।

इस परफॉरमेंस की रचना के बारे में जानकारी देते हुए कृष्णा महावर कहती हैं कि, एक कला शिक्षिका होने के नाते मेरी सर्वप्रथम प्राथमिकता विद्यार्थी ही होते है। और उन्हें एक खुला और स्वतंत्र माहौल देंने के लिए कई बार मुझे सिस्टम से भी बाहर आना पडता है। मैं बहुत गहराई से सोचती हूं कि आर्ट थ्योरी को भी विसुअल तरीके से पढ़ाया जाना चाहिए....इसी प्रक्रिया में एक दिन मैंने कला के तत्वों को परफॉरमेंस के रूप में परिकल्पित किया। और इस परफॉरमेंस के लिए मेरी पहली पसंद स्टूडेंट ही रहे। मैने उन्ही के साथ मिलकर इस विचार को विकसित किया ताकि परफॉरमेंस के साथ उनका सीधा संबंध  स्थापित हो सके। आरंभिक रूप मे यह क्लासरूम का हिस्सा था बाद में एक आर्ट वर्क के रूप में विकसित हो गया।
क्या होता है आर्ट परफॉरमेंस
परफॉरमेंस आर्ट ललित कला की ही एक शैली है। यह नाटक या थिऐटर  से संबंधित नही होती है। परफॉरमेंस में अन्य कलाओ से प्रेरणा ली जा सकती है। इसमे कई बार सब कुछ रेंडम भी हो सकता हैं। इसमे तीन मुख्य तत्व होते है। एक कांसेप्ट, कलाकार का शरीर, और विशिष्ट स्थान। क्योंकि यह लाइव होती है अत: परफॉरमेंस की अवधि को कलाकार स्वयं दर्शकों की रुचि के अनुसार घटा बढ़ा सकता है।

शनिवार, 13 जनवरी 2018

59 वीं राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी के अवार्ड विजेताओं के नाम घोषित

59 वीं राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी के अवार्ड विजेताओं के नाम घोषित
राजस्थान के पंकज गहलोत को मिलेगा अवार्ड
मूमल नेटवर्क, नई दिल्ली। आज दिन में एक पे्रस मीट के तहत ललित कला अकादमी के प्रशासक सी. एस. कृष्णा शेट्टी एवं सचिव विशालाक्षी निगम ने 59 वीं राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी के अवार्ड विजेताओं के नामों की घोषणा की। इस वर्ष 15 कलाकारों को यह प्रदान किया जा रहा है जिनमें राजस्थान के पंकज गहलोत शामिल हैं। विजेताओं को अकादमी एक-एक लाख रुपए के नकद पुरस्कार से सम्मानित करेगी।
विजेताओं का चयन प्रदर्शनी हेतु गठित द्विस्तरीय निर्णायक मंडल द्वारा किया गया जिसमें पूरे देश से कलाकार, कला आलोचक और कला पारखी शामिल थे। ललित कला अकादमी द्वारा गठित प्रथम स्तरीय पांच सदस्यीय निर्णायक मंडल में पटना बिहार से प्रो. श्याम शर्मा, गुवाहाटी असम से नोनी बोरपुजारी, मैसूर कर्नाटक से रामदास अद्यन्तया, खैरागढ़ छत्तीसगढ़ से वी. नागदास तथा नई दिल्ली से जॉनी एम.एल शामिल थे।
द्वितीय निर्णायक मंडल में नोएडा उत्तर प्रदेश से राम वी. सुतार, हैदराबाद मेलंगाना से सूर्य प्रकाश, वाराणसी उत्तर प्रदेश से मदन लाल, बेंगलुरु कर्नाटक से यू. भास्कर राव, एवं चेन्नई तामिलनाडू से प्रो. आर.बी.भास्करन शामिल थे।
विजेताओं के नाम घोषित करते हुए प्रशासक सी. एस. कृष्णा शेट्टी ने कहा कि,  59वीं राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी केवल देशभर के कलाकारों की प्रतिभागिता ही नहीं अपितु उससे बढ़कर है। यह कलाप्रेमियों व कलाकारों के बीच संवाद का एक माध्यम होने के साथ साथ सर्जक और दर्शक के बीच एक रिश्ता भी कायम करती है।
30 से 50 वर्ष तक की आयु के 10 विजेता कलाकार
भुवनेश्वर ओडीशा के ज्योतिप्रकाश सेथी, दिल्ली के विवेक कुमार व चेरिंग नेगी, कोलकाता पश्चिम बंगाल के पप्पू बर्धन, वडोदरा गुजरात के देवाशीष दत्ता, रायपुर छत्तीसगढ़ के  इंदिरा पुरकायस्थ घोष, मुम्बई महाराष्ट्र के विक्रान्त विश्वास भिसे, मैसूर कर्नाटक के शिवकुमार केसरमदु, खैरागढ़ छत्तीसगढ़  के रवि नारायण गुप्ता तथा कोट्टायम केरल प्रदीप प्रताप।
50 वर्ष से अधिक आयु के 5 विजेता कलाकार
शिवगंज राजस्थान के पंकज गहलोत, अन्गामाली केरल के कुमारन के.आर, कोलकत्ता पश्चिम बंगाल के अतिन बासक तथा अमित चक्रवर्ती, दिल्ली के अमित दत्त।
विशिष्ट आमन्त्रित कलाकार
इस प्रदर्शनी में बोस कृष्णामचारी, मनु पारेख,  के.एस. राधाकृष्णन, अद्वैत गणनायक,  ज्योति भट्ट,  एल.एन. लूर और एन. पुष्पमाला जैसे प्रख्यात कलाकारों को अति प्रतिष्ठित आमंत्रित अनुभाग के तहत आमन्त्रित कर उनकी कृतियों को प्रदर्शनी में शामिल किया गया है।
उल्लेखनीय है कि 59वीं राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी के लिये अकादमी को देशभर से 1433 कलाकारों की 3644 कृतियां प्राप्त हुई थीं। निर्णायक मंडल ने राष्ट्रीय प्रदर्शनी के लिए विभिन्न माध्यमों से 171 कलाकारों की 172 कृतियों का चयन किया। इन 172 कलाकृतियों में से 15 राष्ट्रीय अकादमी पुरस्कार विजेताओं का चयन किया गया।
इस वर्ष भारत की स्वतन्त्रता के 70 वर्ष मनाने के उपलक्ष में पुरस्कारों को दो श्रेणियों में विभकत किया गया। जिसमें कलाकारों को एवं 50 वर्ष से अधिक आयु के 5 कलाकारों को राष्ट्रीय पुरस्कारों के लिये चुना गया है।
राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट कलाकरों को मान्यता प्रदान करने और प्रतिभाशाली कलाकृतियों को प्रदर्शित करने हेतु ललित कला अकादमी प्रतिवर्ष राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी का आयोजन करती है। प्रदर्शनी में चित्रकला, मूर्तिशिल्प, ग्राफि क, फोटोग्राफी, एवं  विभिन्न कला माध्यमों की कलाकृतियां शामिल हैं।

बुधवार, 10 जनवरी 2018

अनुभूतियों की सुकोमल दृश्यमयी अभिव्यक्ति

अनुभूतियों की सुकोमल दृश्यमयी अभिव्यक्ति
मूमल नेटवर्क, जोधपुर।
ईस्टर्न आर्ट फाउंडेशन और रमता दृग के संयुक्त तत्वाधान में जोधपुर के शिवदत्त स्मारक में एक दिवसीय अनुवृत्ति कला कार्यशाला का आयोजन किया गया जिसमें मुख्य रूप से पांच संवेदनशील चित्रकारों ने अपनी कला को रेखांकन और पेंटिंग्स के माध्यम से अनेक आयामों  में प्रस्तुत किया।
वास्तव में 'अनुवृतिÓ असल में दृश्य कला माध्यम में चुनिन्दा कलाकारों द्वारा उनके अपने विषय के सन्दर्भ में किये जाने वाले एक अनूठे सहज अभ्यास की सिलसिलेवार प्रयोगात्मक प्रक्रिया का नाम था। वह प्रक्रिया जो  रेखांकन के अलग.अलग पहलुओं को विभिन्न रूपकों के माफऱ्त उसमें व्याप्त कलाकर्म के असल मर्म को ज्यादा गहराई से जानने समझने की ओर प्रेरित करती है। सही अर्थों में यह आयोजन कलाकार का मीडियम से सहज संवाद की संभावनाओं के आयामों को भाव सहित अनावृत्त करने का निरंतरता भरा अनौपचारिक प्रयोजन रहा।

कार्यशाला में कवि चित्रकार अमित कल्ला ने विभिन्न पतली मोटी रेखाओं की सांगत कर प्रकृति के मूर्त अमूर्त रूपों को पेपर और कैनवास पर अपनी तूलिका से उकेरा उनके अनुसार ऐसी कार्यशालाएं हमेशा ही कुछ नया करने की ऊर्जा को सम्प्रेषित करती हैं। जिसमें रूहानियत की तासीर भाव के रूप में  मौजूद होती है। शांतिनिकेतन से यथासम्बन्ध रखने वाले कलाकार यति कासरगोड की अधिकांश कृतियों ने वाश टेक्निक को प्रतिबिम्बित करते हुए अपना आभासी संसार रचा। वरिष्ठ चित्रकार केशव वरनोति ने बिंदु और बिम्ब के बहु रहस्यों को बेहद कऱीने से ड्राइंग के रूप में अपनी स्केच बुक में उकेरा साथ ही कैनवास पर अपने चिरपरिचित अंदाज़ में रंगसाज़ी का आलम सजाया। कला शिक्षक प्रदीप्ता दास ने लोक जीवन के विविध आयामों को सौंदर्यात्मकता के साथ बखूबी अनुसृजित कर अन्य युवा कलाकारों को प्रेरित किया। युवा चित्रकार रूपम पात्रा ने कलर इंक में कई छोटे.छोटे पोट्रेट बनाये जो तकनिकी आधार पर अपनी छाप छोड़ते दिखाई दिए।

कला शोधार्थी हार्दिक और काव्या वरनोति ने भी इस कार्यशाला में अपनी उपस्थिति दजऱ् करवाई उनकी बनायी गयी अमूर्त पेंटिंग और स्त्री के भावमयी रेखांकित कृतियों को वरिष्ठ कलाकारों द्वारा खूब सराहा गया।
लिहाज़ा अनुवृत्ति अपने आप में न केवल एक अलग अनुभव था बल्कि उसे अनुभूतियों की सुकोमल अभिव्यक्ति कहा जाये तो ज्यादा मुनासिब होगा।

सोमवार, 8 जनवरी 2018

20वे कला मेले में राजकीय कन्या महाविद्यालय अजमेर


20वे कला मेले में राजकीय कन्या महाविद्यालय अजमेर
मूमल नेटवर्क, जयपुर। राजस्थान ललित कला अकादमी आयोजित 20वें कला मेले में राजकीय कन्या महाविद्यालय अजमेर की लगभग 20 छात्राओं की कृतियों को प्रदर्शित किया गया। इन कृतियों को दर्शकों की अच्छी सराहना मिली। सभी छात्राएं एम.ए. ड्राईंग एण्ड पेंटिंग की प्रीवीयस व फाईनल ईयर एवं बी.ए पाट्र थर्ड की छात्राएं हैं।अपनी कृतियों के प्रदर्शन को लेकर छात्राओं का उत्साह देखते ही बनता था। लगभग 16 छात्राएं पांचों दिन अपने टीचर्स के साथ कला मेले में उपस्थित रहीं। कला मेले को इन्होने पूरी तरहा से एंजॉय किया। एक छात्रा अपनी तीन वर्षीय बेटी को भी साथ लायी थी। इस बिटिया की बाल सुलभ क्रिड़ाओं ने मेले में मासूमियत के रंग भर कर सबको प्रसन्न किया। छात्राओं ने अपनी रचनाएं वाटर कलर , एक्रेलिक और आयल कलर में की थीं।

इन छात्राओं का काम हुआ प्रदर्शित
ज्योति शर्मा, उर्मिला चाँधरी, प्रियंका शेखावत, रेखा शर्मा, आा, मीनाक्षी, निशा राठौड़, आस्था कुमावत, देवांशी शर्मा, आकांक्षा वर्मा, आरती कंवर, लीना, हेमन्ता मीणा, प्रिया लामा, नेहा राठौड़, नेहा सोनी, अमृता के. चूण्डावत, मुस्कान कनोजिर, एश्वर्या यादव नीलू वर्मा।
इन छाक्षओं के साथ पिगया राव व काजल के काम को भी प्रदर्शित किया गया था।

अब स्कल्पचरर्स से सजेगा टैगोर थिएटर

अब स्कल्पचरर्स से सजेगा टैगोर थिएटर
मूमल नेटवर्क, जयपुर। शहर में विभिन्न कला के संस्थानों की तर्ज पर अब टैगोर थिएटर-18 में भी प्रसिद्ध कलाकारों के स्कल्पचर्स लगाए जाएंगे। शनिवार 6 जनवरी से से इसकी तैयारी शुरू हो गई है। यह कार्य चंडीगढ़ ललित कला अकादमी द्वारा सम्पन्न किया जाएगा।
इन स्कल्पचरर्स को कैंपस के पास स्थित खाली एरिया और लॉन में लगाए जाने की योजना हैे। टैगोर थिएटर के निदेशक कुलदीप शर्मा ने कहा कि टैगोर थिएटर का कैंपस अकसर खाली रहता था, ऐसे में कैंपस को हमने स्कल्पचर्स को सजाने की बात सोची। उन्होनें कहा कि, जल्द ही हम यहां कैफे भी बनाएंगे, जिससे यहां कलाकार आ सकें और कला से जुड़ी बातचीत कर सकें।
चंडीगढ़ ललित कला अकादमी के चेयरमैन भीम मल्होत्रा ने कहा कि अकादमी द्वारा हर वर्ष कई आर्ट वर्कशॉप आयोजित होती हैं। इसमें कई बड़े कलाकार आकर अपनी प्रतिभा दिखाते हैं। इन्हीं कलाकारों द्वारा वर्कशॉप्स में बनाए गए स्कल्पचर्स को पहले सुखना लेक, कलाग्राम और पंजाब कला भवन में लगा चुके हैं और अब टैगोर थिएटर को इन स्कल्पचर्स से सजाने की बारी है।