गुरुवार, 17 अगस्त 2017

'द वर्ल्ड कैलिग्राफी बिनाले' में भारत से एकमात्र विनय शर्मा

 'द वर्ल्ड कैलिग्राफी बिनाले' में भारत से 

एकमात्र विनय शर्मा

मूमल नेटवर्क, जयपुर। कोरिया में आगामी 21 अक्टूबर से 19 नवम्बर तक आयोजित होने वालेे 'द वर्ल्ड कैलिग्राफी बिनाले' में प्रदेश के सुप्रसिद्ध कलाकार विनय शर्मा भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। आयोजन अध्यक्ष के आमन्त्रण पर वो इसमें अपनी कृतियों के साथ उपस्थित हो रहे हैं। इससे पहले विनय ने कतर में दोहा एशियाई खेलों के दौरान आयोजित एशियन आर्ट प्रदर्शनी में भी भारत का प्रतिनिधित्व किया था। इस बैनाले में विनय अपनी कैलीग्राफी कृतियों के प्रदर्शन के साथ लाईव डेमो का भी प्रदर्शन करेंगे।

विनय ने प्राचीन लिपियों की कैलिग्राफी में पुरातन का आधुनिकता में समावेश किया हैं। कैलीग्राफी में उनकी प्रयोगधर्मिता सराहनीय है। उनकी कलाकृतियों में कैलीग्राफी के अनूठे दृश्य उभर कर सामने आते हैं। काफी समय पहले इन्होंने प्रकृति और जीवन से जुड़ी कैलिग्राफी श्रृंखला बनाई थी। इसमें पेड़-पौधों और जीवन से जुड़े सरोकारों की मनोरम प्रस्तुति हुई थी। इन्होंने अपने स्टूडियों में होने वाली विभिन्न कलाओं के अंत:संबंधों पर आधारित प्रयोग यथा नृत्य, नाट्य, वास्तु से जुड़े दृश्यों को भी कैलिग्राफी में व्यक्त किया था। कुछ समय पहले ही लघु कैनवस पर इन्होंने कैलिग्राफी शैली में गणेश के विविध रूपों को प्रदर्शित किया था।
कोरिया में आयोजित होने जा रहे 'द वर्ल्ड कैलिग्राफी बिनाले' में विनय शर्मा भारतीय संस्कृति से जुड़े आख्यानों आधारित अपनी कैलिग्राफी पेंटिंग का प्रदर्शन करेंगे। विनय शर्मा बताते हैं, 'कैलीग्राफी अथवा अक्षरांकन लिखने की ही नहीं कलाकृतियों रचने की भी दृश्यात्मक शैली है। प्राचीन काल में कैलीग्राफी के जरिए ही इतिहास का चित्रात्मक प्रदर्शन किया जाता था। अतीत से जुड़े संदर्भों की कैलिग्राफी दृश्य कहलाती है।'
 उल्लेखनीय है कि वर्ल्ड कैलिग्राफी बिनाले' विश्वभर के कैलिग्राफी कलाकारों का साझा मंच है।

मंगलवार, 15 अगस्त 2017

प्रयोगवादी कलाकार ललित शर्मा को राजकीय सम्मान

प्रयोगवादी कलाकार ललित शर्मा को मिला राजकीय  सम्मान
मूमल नेटवर्क, उदयपुर। मिनिएचर को अपनी शैली और अंदाज में ढालने वाले उदयपुर के वरिष्ठ चित्रकार ललित शर्मा को स्वतन्त्रता दिवस के अवसर पर सम्मानित किया गया है। उन्हें यह सम्मान परम्परागत वास्तुकला के लिए राज्य सरकार द्वारा प्रशस्ति-पत्र के रूप में प्रदान किया गया।
ललित शर्मा के चित्रों में प्रकृति के साथ वास्तु कला का अद्भुत सम्मिरश्रण तथा नगर नियोजन का सुन्दर रूप देखने योग्य होता है। उनके चित्रों में बने हुए मकान व किले ज्यामतिक आंकड़ों की सटीकता लिए होते हैं। पुरखों की परम्परागत लघु चित्र शैली से अलग अपने ही अन्दाज में इस चित्र शैली के मूल भाव को सम्माहित करते हुए उन्होने अपनी एक अलग शैली इजाद की जो उनके बनाए चित्रों के रूप में आज देश-विदेश के कला संग्राहकों के संग्रह में की शोभा बढ़ा रही है।

सोमवार, 14 अगस्त 2017

'आभास' में निशक्त की शक्ति

'आभास'  में निशक्त की शक्ति

मूमल नेटवर्क, जयपुर। इन दिनों जेकेके में प्रिन्ट आर्ट पर आधारित तीन प्रदर्शनियां लगी हुई हैं। पिछले दिनों प्रदर्शनी के दौरान टेक्टाईल आर्ट एक्सपीरियंस वर्कशॉप का आयोलन किया गया जिसमें करीब 100 विद्यार्थियों ने भाग लिया। विशेश बच्चों के लिए आयोजित इस वर्कशॉप में उमंग स्कूल, आरएनकेएस ब्लाइंड स्कूल तथा सेठ आनंदीलाल पोद्दार मूक बधिर संस्थान के विद्यार्थियों ने भाग लिया।
इसके प्रतिभागियों को ब्रेल टेक्टाईल पेंटिंग्स, लार्ज स्क्रिप्ट फॉन्ट्स एवं साइन इंटरप्रेटर्स के बारे में सिखाया गया। इस वर्कषॉप का उद्देश्य आर्ट एग्जीबिशंस को एक्सेसबल तथा डिसेबल फ्र्रेंडली बनाना था। वर्कशॉप का एक उद्देश्य सभी के लिए समान भाव सेकला को सुलभ बनाना भी था।

प्रदर्शनी को डिसेबल फे्रंडली बनाने के लिए विषेष योग्यजनों को आर्ट गैलरीज में प्रिंट्स छूने की स्वतन्त्रता दी गई।। प्रतिभागियों को प्रिंट मेकिंग की विभिन्न तकनीकों की जानकारी दी गई और भारत में पिं्रट मेकिंग की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के बारे में भी बताया गया। सभी संस्थाओं से आए हुए बच्चों ने प्रिंट तकनीक की सरलतम जानकार प्राप्त करने का आनन्द लिया। यह वर्कशॉप हेरिटेज आर्किटेक्ट तथा एक्सेस फॉर ऑल के सिद्धांत शाह के सहयोग से डीएजी मॉडर्न द्वारा आयोजित की गई थी।

शनिवार, 12 अगस्त 2017

काफी कुछ नया करना है


काफी कुछ नया करना है

कला जगत स्चयं को समग्र माने तब ही हर पक्ष का मान बढ़ेगा

राजस्थान ललित कला अकादमी के नवनियुक्त अध्यक्ष डॉ. अश्विन एम. दलवी का कहना है कि अकादमी की वर्तमान गतिविधियों को सुचारु रखते हुए काफी कुछ नया करना है।
पद ग्रहण के बाद डॉ. दलवी ने 'मूमल' से हुई एक विशेष भेंट में अपने पद की जिम्मेदारियों के सकारात्मक स्वप्न का कैनवास बुनते हुए अपने विचार रखे। उनका कहना है कि कला जगत स्चयं को समग्र माने तब ही कला के हर पक्ष का मान बढ़ेगा और वो उन्नति की ओर अग्रसर होगा।
अध्यक्ष ने अपनी युवा व एनर्जिक सोच का परिचय देते हुए कहा कि तय कार्यक्रमों से अधिक एडीशनल क्रिएटिव कार्यक्रम हो इस पर जोर दिया जाएगा। कार्यक्रम सुचारु रूप से सम्पन्न हो सके इसके लिए सरकार से प्राप्त बजट के साथ फण्ड उपार्जन की दिशा में कार्य किया जाएगा। उनका मत है कि कार्यक्रमों में सब लोगों की समान रूप से भागीदारी होनी चाहिए। डॉ. दलवी का कहना है कि कन्टेम्पररी आर्ट को सम्मान देते हुए ट्रेडीशनल आर्ट को भी बराबरी की हिस्सेदारी मिल सके इस दिशा में प्रयत्न किया जाएगा। जो कलाएं या शैलियां लुप्त होने के कगार पर हैं या कम हो गई हैं वो प्रमुखता से उबर कर सामने आएं और रिकवर हों, यह मेरी प्रमुखता रहेगी।
संगीत दिखेगा व चित्र गाएंगे
जब डॉ दलवी से संगीत और दृश्य कला के समन्वय के बारे में पूछा गया तो उनका कहना था कि मैंने संगीत को विजुअल से जोड़कर कार्यक्रम किए हैं और अकादमी में भी ऐसे कार्यक्रम प्लान किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों में संगीत दिखेगा व चित्र गाएंगे।
सबको साथ लेकर चलने की विचारधारा वाले अकादमी अध्यक्ष जल्दी ही अनुभवी कलाकारों की मीटिंग बुलाकर उनसे सलाह मशवरा कर अकादमी कार्यक्रमों को नई दिशा देंगे।
अमुमन जब भी कोई नया अध्यक्ष पद भार ग्रहण करता है तो हाऊस बनने तक चल रहे कार्यक्रमों पर भी ग्रहण लग जाता है। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा डॉ. दलवी का मत है कि समिति गठन का कार्य किसी कार्यक्रम की बाधा नहीं बनेगा, गतिविधियां अपने पूर्व नियोजन के अनुरूप सुचारू रूप से चलती रहेंगी।
अकादमी को लेकर अपने सपनों के प्रति आशान्वित डॉ. दलवी का दावा है कि साल भर के भीतर अकादमी कार्यक्रमों का सकारात्मक लेखा-जोखा वो निश्चित रूप से देंगेे।
डॉ अश्विन महेश दलवी: एक परिचय
सन् 1977 में प्रदेश के जाने-माने तबला वादक स्व. महेश दलवी के घर इनका जन्म हुआ। ऑंख खुलते ही सात सुरों के बीच परवरिश हुई और शिक्षा दीक्षा भी संगीत में ही हुई। पिता की प्रेरणा से सितार इनका प्रिय वाद्य बना और सुर बहार में दक्षता प्राप्त की। संगीत में पोस्ट ग्रेजुएशन के बाद 'पं. निखिल बनर्जी का जीवन परिचय और संगीत जगत को उनकी अनुपम देन' विषय के साथ डाक्टरेट की उपाधि हासिल की। कॅरियर संगीत शिक्षक के रूप में आरम्भ हुआ और देश के ख्यात विश्वविद्यालय वनस्थली विद्यापीठ से लेकर एम.एस. यूनीवर्सिटी बड़ौदा में शिक्षक रूप में कार्य किया। रुझाान संगीत व तमाम कलाओं के रिसर्च के प्रति इतना बढ़ा की बड़ौदा छोड़ अपने गृह नगर जयपुर आकर शोध में सक्रिय हुए और आज भी कई जिज्ञासुओं के मार्गदर्शक व मददगार हैं। संगीत के साथ-साथ इंस्टालेशन में भी इनका योगदान रहा है। डॉ दलवी ने बताया, इस वर्ष के अन्त में जयपुर आर्ट समिट के लिए युवा शिल्पी हंसराज कुमावत के साथ एक इंस्टालेशन तैयार करने की योजना है।

शुक्रवार, 11 अगस्त 2017

59वीं वार्षिक कला प्रदर्शनी के लिए कलाकृतियां आमन्त्रित

59वीं वार्षिक कला प्रदर्शनी के लिए कलाकृतियां आमन्त्रित

मूमल नेटवर्क, जयपुर। राजस्थान ललित कला अकादमी द्वारा 59वीं वार्षिक कला प्रदर्शनी के लिए कलाकारों से कलाकृतियां आमन्त्रित की जा रही हैं। हमेशा कमी तरहा इस वर्ष भी प्रदर्शनी में शामिल होने के लिए प्रवेश शुल्क 100 रुपए रखा गया है। अकादमी में कलाकृतियां जमा करवाने की अन्तिम तिथि 27 सितम्बर है।
सर्वश्रेष्ठ 10 कृतियों को 25-25 हजार रुपए की नकद पुरस्कार राशि से सम्मानित किया जाएगा। इन 10 पुरस्कारों में से 2 ग्राफिक ड्राईंग कृतियों को तथा 2 मूर्तिकला को दिए जाएंगे। नियम के अनुसार जो कलाकार पुरस्कार के लिए कृतियां नहीं दे सकते वे 'प्रतियोगिता के लिए नहीं' श्रेणी में प्रदर्शनी का हिस्सा बन सकते हैं। प्रत्येक कृतिकार को तीन कृतियां भेजना अनिवार्य है।

राजस्थान स्कूल ऑफ आर्ट प्रिंसिपल का पद ग्रहण करेंगी डॉ. भारद्वाज

कल राजस्थान स्कूल ऑफ आर्ट प्रिंसिपल
 का पद ग्रहण करेंगी डॉ. भारद्वाज
मूमल नेटवर्क, जयपुर। कल 11 अगस्त को डॉ. ज्योत्सना भारद्वाज राजस्थान स्कूल ऑफ आर्ट के प्रिंसिपल पद का भार ग्रहण करेंगी। डॉ. ज्योत्सना को आयुक्तालय कालेज शिक्षा के संयुक्त निदेशक प्रशासन से ट्रांसफर कर प्रिंसिंपल स्कूल ऑफ आर्ट पद पर लगाया गया है। डॉ. ज्योत्सना की सेवानिवृति अक्टूबर 2018 में होनी है। उल्लेखनीय है कि 3 अगस्त को डॉ. अखिलश्वर शर्मा द्वारा एच्छिक सेवानिवृति लेने के बाद प्रिसिंपल पद रिक्त हो गया था।

डॉ. अश्विनी एम. दलवी ने ग्रहण किया राजस्थान ललित कला अकादमी का अध्यक्ष पद

डॉ. अश्विनी एम. दलवी ने ग्रहण किया 
                   राजस्थान ललित कला अकादमी का अध्यक्ष पद

डॉ. दलवी मूल रूप से म्यूजिक कम्पोजर हैं। पिछले कुछ वर्षों से जयपुर के नाद साधना इंस्टीट्यूट ऑफ इण्डियन म्यूजिक एण्ड रिसर्च सेंटर के सचिव पद पर कार्य कर रहे हैं। यह तबला गुरु स्व. महेश दलवी के पुत्र हैं। ललित कला अकादमी में यह विजुअल आर्ट के विकास की देखरेख करेंगे।

मूमल नेटवर्क, जयपुर। राजस्थान ललित कला अकादमी के अध्यक्ष पद का भार आज सुर साधक डॉ. अश्विनी एम. दलवी ने ग्रहण किया। इन्हें कल 10 अगस्त को राज्य सरकार ने इस पद के लिए मनोनीत किया था।