गुरुवार, 22 फ़रवरी 2018

कला रचनाओं में आकार लेती अभिव्यक्तियां

कला रचनाओं में आकार लेती अभिव्यक्तियां
खजूराहो नृत्य समारोह में चित्रों के रंग
खजुराहो नृत्य समारोह में दक्षिण मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र नागपुर द्वारा आयोजित तीन दिवसीय कार्यशाला का आज समापन है। नृत्य का साथ देते चित्रों ने इस समारोह को रंगों से भर दिया है।
समारोह के आरम्भ में 20 फरवरी से जूनियर आर्टिस्ट कैम्प कैम्प में दो समूहों समकालीन व जनजातीय में चित्रकारों ने अपनी रचनाओं को साकार किया है।
समकालीन समूह के चित्रकारों में आनंद डबली (नागपुर), प्रेम कुमार सिंह सिकरवार (धार मध्यप्रदेश), रोशनी गोपाल राव इंगोले ( नागपुर), दिव्या खरे (ग्वालियर), सुनील कुमार सिंह (सुल्तानपुर उत्तर प्रदेश), भूपेंद्र कुमार अस्थाना (ग़ाजिय़ाबाद उत्तर प्रदेश), ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह ( प्रतापगढ़ उत्तर प्रदेश), मुकेश कुमार (नई दिल्ली), कृति सक्सेना (आगरा उत्तर प्रदेश) शामिल हैं।
जनजातीय और लोक चित्रांकन समूह के चित्रकारों में कैलाश चंद्र जेना (पूरी उडि़सा), कालूराम टेकम (भोपाल मध्य प्रदेश), दीपक भंडारी (काँगड़ा हिमांचल प्रदेश), सुमन भारद्वाज (कांगड़ा हिमांचल प्रदेश), संतोष कुमार महाना (पूरी उड़ीसा), रहमान पटेल (गुलबर्गा कर्नाटक), सुनील कुमार (कांगो), राजीव कुमार (कांगड़ा हिमांचल प्रदेश), दिनेश पालीवाल (उदयपुर राजस्थान), संजीव कुमार (कांगड़ा हिमांचल प्रदेश) ने भाग लिया है।
कार्यशाला में चित्रकारों ने अपने मनोभावों को कैनवास पर रूप प्रदान किया।   -भूपेन्द्र आस्थाना





सांभर महोत्सव कल से

सांभर महोत्सव कल से
दिखेंगे कला के विभिन्न रंग
मूमल नेटवर्क, जयपुर/सांभरलेक। राजस्थान में कला और संस्कृति के माध्यम से पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयेजित सांभर महोत्सव में रंग भरने के लिए जयपुर आर्ट समिट की तरफ से कला चर्चा, कला प्रदर्शनी व कला कैम्प का आयोजन किया जाएगा।।

कला प्रदर्शनी 

प्रदर्शनी में भारत सहित बारह देशों के 30 कलाकारों की चुनिंदा कलाकृतियों को प्रदर्शित किया जायेगा। अन्य देशों में बब बांग्लादेश, इजिप्ट, ईरान, साऊथ कोरिया, श्रीलंका, ग्रीस, अमेरिका, यमन, स्विट्जऱलैंड, ऑस्ट्रेलिया और लेबनान होंगे। प्रदर्शनी के कोऑर्डिनेटर आर्टिस्ट रवि माइकल एवं मूर्तिकार एल एन नागा हैं।

प्रदर्शनी में शामिल कलाकार
इजिप्ट - अबु एलेंगा
बांग्लादेश - रंजीत दास, मेहबूब मुर्शिद
ऑस्ट्रेलिया - डेनियल कांनेल
ईरान - आमिर जोकर
ग्रीस - नटीना अनस्तसयादौ (मूर्तिशिल्प)
लेबनान - कासिर राशा
साउथ कोरिया - युनसूक ली, कयूनयंग सांग, मिजो ली
स्विट्जरलैंड - हमौदा अब्देर्राजक
श्रीलंका - चामिंदा गामागे, सारथ परेरा
अमेरिका - लेरोय पारकर
यमन - मज़हर निज़ार
भारत - एस जी वासुदेव, अंजनी रेड्डी, श्रीधर अइयर, रविन्द्र साल्वे, चरण शर्मा, विजेंद्र शर्मा, आलोक भट्टाचार्य, विनोद शर्मा, अमृत पटेल, अविनाश कर्ण, रिनी धुमाल (मूर्तिशिल्प)
इन कलाकारों के साथ राज्य की कुछ महिला कलाकारों का आर्ट इंस्टालेशन भी प्रदर्शित किया जायेगा। इसमें प्रमुख कलाकार सविता शर्मा और शालू शर्मा हैं।

महिला आर्टिस्ट कैंप

समिट द्वारा महिला आर्टिस्ट कैंप का आयोजन किया जा रहा है। जिसका मुख्य उद्देश्य महिला सशक्तिकरण के तहत प्रदेश की युवा महिला कलाकारों को कला जगत में पहचान बनाने के अवसर प्रदान करना है। इस कैम्प में जयपुर आर्ट समिट का साथ व्हाइट कैनवास दे रहा है। कैंप के कोऑर्डिनेटर आर्टिस्ट हंसराज कुमावत हैं। आयोजकों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार कैंप का उद्घाटन कला, साहित्य, संगीत, समाजसेवा, खेलकूद, शिक्षा, पर्यटन इत्यादि के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान बनाने वाली प्रदेश की महिलाओं द्वारा किया जायेगा।
कैम्प के कलाकार 
शिखा राजोरिया, शिखा कुमारी, आकांक्षा अग्रवाल, दीपाली शर्मा, श्रेया सिंह, आशा कुमारी, छवि शर्मा, बरखा मीना, कुसुम चौहान, पूजा भार्गव, मनीषा खींची, दुर्गा राठौर एवं पूजा सोनी।

कला चर्चा 

कला के समसामयिक महत्व को ध्यान में रखते हुए  'कलात्मक सौंदर्यबोध में स्वच्छता के साक्ष्य और संप्रेषण' बिषय पर कला चर्चा की जायेगी। कला चर्चा में कला के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े ऐसे कलाकारों के साथ बातचीत की जायेगी जिन्होंने कला को संकीर्ण परिधि से ऊपर उठाकर आम आदमी के मन से स्वार्थ, परिवार, क्षेत्र, धर्म, भाषा और जाति आदि की सीमाएँ मिटाकर कला को विस्तृत करते हुए व्यापकता प्रदान की है। फेस्टिवल में उपस्थित विभिन्न आर्टिस्ट, कला मर्मज्ञ,  कंपनी प्रशासक, देश और विदेश से आये मेहमानों कला की इस खुली चर्चा में भाग लेंगे। कला चर्चा का कोआर्डिनेशन लेखक एवं कलाकार अमित कल्ला करेंगे। 

साइनोटाइप वर्कशॉप का हुआ समापन

साइनोटाइप वर्कशॉप का हुआ समापन
प्रतिभागियों ने सीखा एसिड-फ्री 'साइनोटाइप' प्रिंटमेकिंग आर्ट
मूमल नेटवर्क, जयपुर। साइनोटाइप प्रिंटमेकिंग की नॉन-टॉक्सिक तकनीकें सिखाने के लिए जवाहर कला केंद्र द्वारा आयोजित वर्कशॉप का कल समापन हुआ। रीफर्बिश ग्राफिक आट्र्स स्टूडियो में चल रही वर्कशॉप में छाप फाउण्डेशन की कविता शाह ने प्रतिभागियों को प्रिंटिंग की वैकल्पिक विधि ईको-फ्रेंडली प्रोसेस सिखाया।
कविता शाह ने बताया कि प्रिंट मेकिंग की वैकल्पिक प्रोसेस का उपयोग करके हम ना सिर्फ पर्यावरण बल्कि प्रिंट मेकर्स की रक्षा भी कर रहे हैं जो प्रिटिंग के दौरान विभिन्न विषैले रसायनों को श्वसन प्रक्रिया के दौरान ग्रहण करते हैं। नई पीढ़ी को इन तकनीकों को सिखाना इसलिए आवश्यक है ताकि वे जहरीले रसायनों का उपयोग नहीं करें। नई पीढ़ी इन वैकल्पिक तकनीकों को आगे बढ़ाने में मदद कर सकती है और दूसरों को इसके बारे में जानकारी भी दे सकती है।
इस वर्कशॉप में 10 प्रतिभागियों ने ब्लू प्रिंट मेकिंग के आसान तरीके सीखे। उल्लेखनीय है कि 'साइनोटाइप' वर्कशॉप जेकेके में फरवरी एवं मार्च माह में आयोजित की जा रही चार वर्कशॉप श्रृंखला की दूसरी कार्यशाला है। इन सभी वकशॉप्स का मुख्य फोकस पर्यावरण की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए गैर-विषैली सामग्री का उपयोग करना है। 

बुधवार, 21 फ़रवरी 2018

नीड ऑफ द हवर -आलटरनेटिव आर्ट स्पेसस

नीड ऑफ  द हवर -आलटरनेटिव आर्ट स्पेसस
मूमल नेटवर्क, लखनऊ। कल शाम 4 बजे ललित कला अकादमी के अलीगंज स्थित क्षेत्रीय कार्यालय में नीड ऑफ  द हवॅर -आलटरनेटिव आर्ट स्पेसस विषय पर प्रानामिता बोरगोहेन ने व्याख्यान दिया।
उदाहरण सहित व्याख्यान देते हुए आर्ट क्यूरेटर एव आर्ट क्रिटिक प्रानामिता बोरगोहेन ने वैकल्पिक कला संस्थायो अथवा स्थानों की अवश्यकता पर विशेष रूप से बल दिया। इनका मानना है कि खोज एवं 1शान्तिरोड बैगलुरू जैसी संस्थाएं युवा उदीयमान कलाकारो को प्रयोगात्मक कार्य करने के लिए प्रेरित करते है ताकि वह कला जगत मे अपना स्थान बना सके।
उन्होंने बताया कि, अमेरिका में इस तरह का प्रयोग वर्ष 1970 में आरम्भ हुआ था। वहा पर फूड एवं द किचन नामक व्यवसायिक संस्थाओ ने अपने स्थान को कला वीथिका मे शमिल किया। इस प्रयोग से नये कलाकारो की कृतियो को जनमानस से जोड गया । हमारे देश मे इस तरह के प्रयोगो के लिए बहुत स्कोप है जैसे की मेट्रो स्टेशन, एयरपोर्ट, व्यस्त बाजार जैसे पब्लिक प्लेसेस में कलाकृतियो का निर्माण ना केवल सौन्दर्यबोध में अभिवृद्धि कर सकते है साथ ही कलाकार की सृजनशीलता को भी एक प्लेटफार्म प्रदान कर सकते है । 

मंगलवार, 20 फ़रवरी 2018

आज से शुरू हुई प्रदर्शनी अभिव्यक्ति-एक प्रयास


आज से शुरू हुई प्रदर्शनी अभिव्यक्ति-एक प्रयास
आईआईएस यूनिवर्सिटी की 18वीं वार्षिक कला प्रदर्शनी
मूमल नेटवर्क, जयपुर। जवाहर कला केन्द्र की चतुर्दिक कला दीर्घा में आज से आईआईएस यूनिवर्सिटी की 18वीं वार्षिक कला प्रदर्शनी अभिव्यक्ति-एक प्रयास शुरु हुई। प्रदर्शनी का उद्घाटन राजस्थान ललित कला अकादमी के चैयरमैन डॉ. अश्विन एम. दलवी ने किया।
इस प्रदर्शनी में विज़ुअल आटर््स विभाग की लगभग 185 छात्राओं ने 1500 कलाकृतियां के जरिये अपनी सोच, भावनाओं व विचारों को रंगों, स्ट्रोक््स, टेक्स्चर और कला के रूप में अभिव्यक्त किया है।
इस चार दिवसीय प्रदर्शनी में पेंटिंग के साथ ब्लू पॉटरी, क्ले, टैराकोटा, फाइबर ग्लास, मेटल एवं कॉन्क्रीट का इस्तेमाल करते हुए छात्राओं ने अपने भावों को बहुत ही खूबसूरती के साथ कृतियों के रूप में ढाला है। प्रदर्शनी 23 फरवरी तक चलेगी।

बहुमाध्यम कलाकार शिविर में शुरु हुई ग्राफिक व पेंटिंग की रचना

बहुमाध्यम कलाकार शिविर में शुरु हुई ग्राफिक व पेंटिंग की रचना
मूमल नेटवर्क, लखनऊ। ललित कला अकादमी के  क्षेत्रीय केन्द्र में क्षेत्रीय बहुमाध्यम कलाकार शिविर में कल 19 फरवरी से ग्राफिक एवं पेंटिंग विधा के कलाकारों ने अपनी कृतियों को आकार देना शुरु कर दिया है। क्षेत्रीय केन्द्र के सचिव प्रभारी राजेश कुमार शर्मा ने पुष्प गुच्छ देकर सभी कलाकारों का अभिनन्दन किया।
उल्लेखनीय है कि इस शिविर में 18 कलाकार प्रतिभागी हैं। मूर्तिकला एवं सिरेमिक विधा के कलाकार 116 फरवरी से अपनी कृतियों को आकार दे रहे हैं।फरवरी तक अपनी रचना करेंगें जबकि 19 से 25 फरवरी,तक ग्राफिक एवं पेंटिंग विधा के कलाकार अपनी कृतियों को आकार देंगे।

यह हैं प्रतिभागी कलाकार
दिनेश सोनकर, मऊ
राम मिलन सिंह, मऊ
अभिषेक शर्मा, मऊ
बलदाऊ जी वर्मा, मऊ
त्रिभुवन कुमार, मऊ
रोकेश कुमार सिंह, उदयपुर
संदीप कुमार मेघवाल, उदयपुर
मयंक शर्मा, उदयपुर
मो. तलहा वाहिद, बरोडा
क्रुनाल कहार, बरोडा
मंजीत सिंह वर्मा, लखनऊ
नीलम कुमारी, लखनऊ
मैत्री विजय छेदा, महाराष्ट्र
अनस सुल्तान, मेरठ
कृष्णा फूलवाला, वडोदरा
प्रवीन सुरेश हाथवर, वडोदरा
अजीत कुमार मौर्या, जौनपुर
श्रद्धा तिवारी, कानपुर

सोमवार, 19 फ़रवरी 2018

पूर्वोत्तर चित्रकार शिविर का आज हुआ समापन

पूर्वोत्तर चित्रकार शिविर का आज हुआ समापन
मूमल नेटवर्क, लखनऊ। ललित कला अकादमी के अलीगंज स्थित क्षेत्रीय केन्द्र में चल रहे पूर्वोत्तर चित्रकार शिविर  का आज शाम 4 बजे समापन हुआ। समापन पर शिविर में रचित कृतियों को प्रदर्शित किया गया। शिविर में भाग ले रहे 10 कलाकारों ने अपने मनोभावों को कृतियों के रूप में जीवन्त किया है।
मणिपुर के कलाकार अथोकपम कुबेर सिंह ने नेचर शीर्षक से कृति की रचना की है। अपनी कृति में उन्होंने ब्रह्यण्ड में प्रकृति के बीच निरंतर चलते द्वंद को दर्शाया है जिसे महसूस किए बिना मानव अपनी लालसा मे पड़कर प्रकृतिक सुंदरता को बेरहमी से नष्ट कर देता है।
गोवाहाटी असम की रिकूं चक्रबती ने ब्यूटी आफ  असम नामक कलाकृति की रचना की है। रिंकू असम के प्राकृतिक सौन्दर्य से बहुत प्रभावित है इसलिए प्राकृतिक सुन्दरता को अपना विषय बनाया है ।

एच लक्ष्मी इस शिविर में हिससा लेने के लिए मणिपुर से आई हैं। इन्होंने अपनी अनटाईटिल्ड पेंटिंग में जीवन के दुख सुख को व्यक्त करने की कोशिश की है। लक्ष्मी का कहना है कि हर व्यक्ति के जीवन में सुख और दुख दोनो होते है पर जीवन को जीने के लिए हमें खुश रहना होता है और अपनी उदासीनता को ढकना होता है।
मणिपुरकी ही पूर्णिमा नानगॉव का मानना है कि बचपन से ही हम अपने माता पिता की विचारधाराओं पर जीवन व्यतीत करते है पर जब हम किशोरावस्था पर पहुँचते है तो जीवन को अपने नजरिए सेे व्यतीत करते है। इन्हीं विचारों का चित्रण उन्होंने अपनी पेंटिंग रिब्यूक में किया है ।
पूर्वोत्तर के दीपेन्दु बाउल ने फिलहाल मुम्बई को अपनी कर्मभूमि के रूप में चुना है। लखनऊ कलाकार के जेहन में बसता है। इस शहर के बारे में जो कुछ दीपेन्दु ने फिल्मों में देखा और सुना उन्हीं स्मृतियों को अपनी कृति मुजरा के जरिये चित्रित किया है।
वाश शैली में पारंगत उत्तर प्रदेश के चित्रकार राजेन्द्र प्रसाद ने इसी शैली में अपनी कृति आवाहन की रचना की है।
कर्नाटक से आए आर्टिस्ट शकंर वी कड़ाकुन्टला  ने अपनी कलाकृृति में कर्नाटक की समाजिक परंपराओ और त्यौहारों का चित्रण किया है। अपनी कृति को उन्होने टाईगर नाम दिया है। कृति मेेंं कलाकार ने यह दर्शाया है कि कर्नाटक में मौहर्रम के अवसर पर हिन्दू धर्मावलम्बी जुलुस मे शिरकत करते है एवं अपने शरीर पर विभिन्न प्रकार के रंग लगाते है। इस परम्परा से हिन्दू मुस्लिम एकता के भाव जाहिर होते हैं जो कलाकार के अन्तरमन को प्रभावित करते हैं।
प्रमोद आर्या चंडीगढ़ से हंै। उन्होनें अपनी कलाकृति माइन्डस्केप में लखनऊ के सुहावने मौसम, गोमती तटबन्ध और यहाँ के जीवन व पुरातन इमारतो से प्रभावित होकर सफेद पत्थरो से निर्मित इमारतों की कल्पना करते हुए तत्कालीन सभ्यता को दर्शाया है
अर्चना यादव भोपाल से आई हैं। इन्होंने व्यक्ति की बौ़िद्धक स्वतंत्रता के असीमित होने एवं सीमाओं से परे होने का चित्रण अपनी अनटाईटिल्ड कृति में किया है।
बैलून गर्ल शीर्षक की कृति कर्नाटक के विठ्ठल रेड्डी चुलाकी ने की है।