शनिवार, 14 अक्तूबर 2017

कला मेला जनवरी 2018 के पहले सप्ताह में

कला मेला जनवरी 2018 के पहले सप्ताह में
मेला कमेटी गठित
मूमल नेटवर्क, जयपुर। राजस्थान ललित कला अकादमी का वार्षिक आयोजन कला मेले का 20वां एडीशन नववर्ष की शुरुआत में करना तय किया गया है। यह मेला संभवत 3 से 8 जनवरी के मध्य रवीन्द्र मंच पर आयोजित होगा।
इस मेले के लिये कमेटी का गठन 12 अक्टूबर को किया गया। कमेटी में जयपुर के सात, बूंदी का एक व उदयपुर के तीन कलाकार शामिल किये गये हैं। कमेटी के प्रमुख नात्थूलाल वर्मा होंगे और अन्य सदस्यों में जयपुर से तिलक गीताई, लोकेश जैन, महावीर मूर्तिकार, भुवनेश जैमिन, श्वेत गोयल व सुरेन्द्र सोनी, बूंदी से डॉ. हेमलता कुमावत, उदयपुर से राधा कृष्ण वशिष्ठ, नरेन्द्र सिंह चिंटू तथा हेमन्त जोशी शामिल हैं।
उल्लेखनीय है कि 19वां कला मेला उदयपुर में नवम्बर 2016 में आयोजित हुआ था जो कि बगैर मेला कमेटी के सफलता पूवर्क सम्पन्न हुआ। जबकि 18वां कला मेला मार्च 2015 में जयपुर के जेकेके स्थित शिल्पग्राम में आयोजित किया गया था जो मेला कमेटी की हठधर्मिता व अव्यवस्थाओं के चलते फ्लाप शो साबित हुआ था।

गुरुवार, 5 अक्तूबर 2017

रंग लहर का तीसरा पार्ट कल से


रंग लहर का तीसरा पार्ट कल से   
अजमेर के रंग लहर के तीसरे भाग में रंग भरने तैयारियां परवान पर
मूमल नेटवर्क, जयपुर। अजमेर को खूबसूरती प्रदान करने और कला एवं संस्कृति को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से नगर निगम की ओर से रंग लहर कार्यक्रम की तीसरा भाग कल 7 सितम्बर को आरम्भ होगा। प्रशासन के साथ कला विद्यार्थी व वरिष्ठ कलाकार बहुत ही उत्साह के साथ इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए तैयारियों में जुटे हुए हैं।
जब कुछ कर गुजरने की तमन्ना मन में होती है तो बाधाएं भी फूल बन जाती हैं। अजमेर के कलाकारों ने भी जब अपने शहर के सुन्दर रूप की कल्पना की तो कई हाथ आगे बढे और कलाकारों के स्वपन ने उनकी मेहनत का साथ पाकर वास्तविकता का आकार लिया।

सितम्बर के शुरू होते ही स्मार्ट सिटी बनने जा रहे अजमेर को खूबसूरती प्रदान करने और कला एवं संस्कृति को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से नगर निगम की ओर से रंग लहर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए शहर के नामचीन कलाकार वह कई विद्यालयों के विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। इसमें लोक कला संस्थान के प्रमुख संजय सेठी व उनके साथी चित्रकारों ने मुख्य भूमिका निभाई।
कार्यक्रम की शुरुआत के साथ रंगों की लहर ऐसी चली कि लहर भाग दो का भी आयोजन करना पड़ा और अब लहर भाग तीन कल 7 सितम्बर को होने जा रहा है जिसकी तैयारियां जोर-शोर से की जा रही हैं। रंग लहर भाग - 3 में नगर निगम अजमेर के पटेल स्टेडियम की बाहरी दीवार  प्रात: सात बजे से चित्रित करना आरम्भ किया जाएगा। कलाकारों की हौसना अफजाई व अपने शहर को सुन्दर चित्रण से सजता हुआ देखने के लिए लोक कला संस्थान ने शहरवासियों को आमन्त्रित किया है।

अंतर्मन में कला की लय और उसका स्पंदन

(इस बार अतिथी लेखक के रूप में जयपुर आर्ट समिट के डायरेक्टर एस.के.भट्ट का आलेख प्रस्तुत है जिसमें उन्होने कलाकार की कला चेतना को प्रखर रहने और उनकी कृतियों में जीवन्तता को महसूस करने के लिए अन्र्तमन में उठने वाली कला की लय और उसके स्पन्दन की महत्ता का वर्णन किया है।     -सं.)

अंतर्मन में कला की लय और उसका स्पंदन
वर्तमान परिप्रेक्ष्य में हम अक्सर दूसरों की सभी समस्याओं और अन्य वैश्विक मुद्दों जैसे जलवायु परिवर्तन, आतंकवाद अथवा मानवीय सम्वेदना से जुड़े अन्य किसी सार्वजानिक मुद्दों से स्वयं को अछूता महसूस करते हैं, भले ही हम आसानी से इनमें से कुछ मुद्दों में अपने ज्ञान से दूसरों के अज्ञान को कुछ हद तक दूर करने में कुछ मदद कर सकते हैं किंतु हम अपने अंतर्मन में दृढ़ता से यह पर्याप्त महसूस नहीं कर पाते हैं कि हम भी एक वैश्विक समुदाय का बड़ा हिस्सा हैं। यह अंतर्मन की वह स्थिति है जहां कला की चेतना और कला की अभिव्यक्ति हमारी सोच के अंतर में सामंजस्य और लय को स्थापित कर सकती है। कला लोगों को कभी यह नहीं दिखाती है कि क्या करना है, फिर भी कला में या कला के लिये कोई भी अच्छा काम करने से आप अपनी इंद्रियों, शरीर और अंतर्मन को एक लय में जोड़ सकते हैं और आपकी यही सोच ही आपको दूसरे लोगों और दुनिया को आप से अलग करते हुये आपकी इस विशिष्टता के कारण आपकी उपस्थिति को महसूस करवाती है।
एक वित्तीय सलाहकार के रूप में, मैंने पिछले 30 सालों में दुनिया के कई देशों में यात्रायें की हैं लेकिन मैंने कभी अपने अंतर्मन की छिपी उस लय को जो कला को जोड़ती है को कभी खोने या सोने नहीं दिया।अपने दैनिक कार्यों में या कहीं भी किसी वैश्विक समस्या के वाद विवाद के दौरान हो सकता है कभी आप, अपने को अपनों के सामने खड़ा पायें और विचारों का आदान-प्रदान करें और उसके तुरंत बाद किसी मीटिंग में अपनी राय किसी और मुद्दे पर दें, अथवा उसके बाद किसी फिल्म या किसी उपन्यास पर चर्चा करें या कुछ समय के बाद किसी कला या कला प्रदर्शनी के बिषय पर चर्चा करें या पारिवारिक प्राथमिकताओं की प्रबंधन प्रक्रिया में संलग्न हो जायें किंतु कहीं भी किसी भी स्थिति में आप अपने अंतर्मन में कला की लय को थमने ना दें क्योंकि यही लय आपकी सफलता की सीढ़ी हो सकती है।
यहां पर में बताना चाहूंगा कि अंतर्मन में कला की लय को जीवित बनाये रखना ही मुझे वित्तीय प्रबंधन के काम करने के दौरान उन व्यक्तियो के संपर्क में लाया जो कहीं न कहीं अपने अंतर्मन के विभिन्न दृष्टिकोणों में भी कला की लय को जीवंत बनाये हुए हैं और वास्तव में अलग-अलग धारणाओं, विचारों और समस्याओं में घिरे होते हुए भी स्वयं को सफल प्रबंधक स्थापित कर सफल व्यक्तित्व के पर्याय बन पाये हैं। हमारे अंतर्मन की लय हमें हमारी निर्णयन प्रक्रिया को गहराई से प्रभावित करती है कुछ लीक से हटकर करने के लिए प्रेरित करती है। हममें से अधिकांश कला को देखने और उससेे प्रेरित होने की भावना को जानते हैं, चाहे यह एक गीत, नाटक, कविता, संगीत, उपन्यास, पेंटिंग, फिल्म या और भी कुछ हो, वो सब अस्थायी ही है जब तक कि ये हमारे अंतर्मन की लय से मिलान ना कर पाये क्योंकि जब हम कुछ देखते हैं, छूते हैं, चलते हैं, सुनते हैं हमारा अंतर्मन हमें एक नयी सोच और औचित्य की परख की स्वाभाविक प्रक्रिया में ले जाता है जिसमें अंतर्मन की लय का स्वभाव इसको ग्रहण अथवा निष्क्रिय करता है जिसे हम अनुभव भी कह सकते हैं।
मुझे विश्वास है, अंतर्मन की लय को सुनना और उसपर समसामयिक कला की रचना करना कलाकारों की प्रमुख जिम्मेदारियों में से एक है और शायद यही लय और विचार कुछ कलाकारों के लिए एक सिर्फ रचना है जबकि इस बिषय से जुड़े अन्य व्यक्तियों के लिए कभी ये आश्चर्य के रूप में भी हो सकता है। एक आम आदमी जो कि आज सिर्फ अपने अस्तित्व की लड़ाई और जीवन के संघर्ष से थककर कुछ पल कला को देखने तो आता है लेकिन वो कला को देखने की बजाय कला के साथ सार्वजानिक मुठभेड़ करता है क्योंकि कला और संस्कृति आज हमारे समाज की जरूरत होने के स्थान पर शाब्दिक फैशन की बीमारी से ज्यादा ग्रस्त हैं। वे लोग जो कि किसी क्षेत्र विशेष का प्रतिनिधित्व करते हैं या जहां अपने अनुभव साझा करने के लिए अंतर्मन की लय के विरुद्ध किसी भी प्लेटफार्म पर एक साथ आ सकते हैं आज भी दुनिया को वही घिसे-पिटे तरीकों से देखते हैं क्योंकि वो अंतर्मन की लय को जीवन से तालबद्ध नहीं कर पाते हैं। यहां महत्वपूर्ण बात यह नहीं है कि हम अंतर्मन की लय और अपने निजी अनुभव में कितनी ईमानदारी से कितने तालबद्ध हैं जिसे हम साझा करने की बजाय दिशा निर्देशित करने की कोशिश करते हैं जबकि हमें यह मंथन करना चाहिये कि अनुभव साझा करने के लिए हम अपने को कितना उपयुक्त मानते हैं।
आज के व्यावसायिक मूल्यों में भी सिर्फ नजरिया बदलने की जरुरत है क्योंकि आज भी अंतर्मन में कला की लय एक अनुभूति, अंतज्र्ञान, अनिश्चितता, रचनात्मकता संजोकर रखने और नए विचारों के लिए लगातार खोज करने के लिए हमें प्रोत्साहित करती है कि हम कला की दुनिया को बदलने के लिए दुनिया के साथ संलग्न रहकर भी अंतर्मन की लय को तालबद्ध कर एक नयी धारा प्रवाहित कर सकते हैं।
                                                                                                                               -शैलेंद्र भट्ट

मंगलवार, 3 अक्तूबर 2017

कल 4 अक्टूबर को जोधपुर मनाएगा साफा दिवस

कल 4 अक्टूबर को जोधपुर मनाएगा साफा दिवस
मूमल नेटवर्क, जोधपुर। राजस्थान टूरिज्म एवं जिला प्रशासन आयोजित दो दिवसीय मारवाड़ फेस्टिवल के अवसर पर साफा दिवस का आयोजन किया गया है। फेस्टिवल के पहले दिन 4 अक्टूबर को आयोजित हैरीटेज वॉक में कलाकार साफों को पहनकर वॉक करेंगे। यह वॉक मेहरानगढ़ से आरम्भ होकर उम्मेद स्टेडियम पर जाकर समाप्त होगी।
वॉक में शामिल कलाकार 4 अक्टूबर की सुबह आठ बजे होने जा रही साफा पेंटिंग में भाग लेंगे। साफा पेंटिंग व हैरीटेज वॉक में सम्मिलित हुए कलाकारों को राजस्थान टूरिज्म एवं जिला प्रशासन द्वारा सर्टीफिेट से सम्मानित किया जाएगा।
फेस्टिवल में चित्रकारों को मारवाड़ संस्कृति पर आधारित पेंटिंग प्रदर्शित व सेल करने का भी अवसर दिया गया है। साफा पेंटिंग में भाग लेने के लिए कलाकारों को कला सामग्री व साफा स्वयं लाना होगा।

महावीर भारती मूर्तिकार हुए ह्यूमन अचीवर अवार्ड 2017 से सम्मानित

महावीर भारती मूर्तिकार हुए 
ह्यूमन अचीवर अवार्ड 2017 से सम्मानित
मूमल नेटवर्क, जयपुर। मूर्तिकला के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने के लिए राजस्थान के मूर्तिकार महावीर भारती को ह्यूमन अचीवर अवॉर्ड प्रदान किया गया है। ह्यूमन राइट्स काउंसिल ऑफ इंडिया और सर्व सेवा कार्य समिति की ओर से गांधी जयंती के पूर्व दिवस एक अक्टूबर को दिल्ली प्रेस क्लब में आयोजित एक समारोह में उन्हें सम्मानित किया गया। इस समारोह के मुख्य अतिथि  दिल्ली की एसीपी मीना नायडू थी। विशिष्ट अतिथी के रूप में विश्व सुंदरी 2015 रूबी यादव उपस्थित थी। 
शुरवीरों की मूर्तियों को बनाने के लिए अपनी विशेष पहचान बना चुके महावीर भारती की तैयार की गई महाराणा प्रताप की मूर्ति उदयपुर शहर के महत्वपूर्ण दर्शनीय स्थलों में शामिल है। महावीर भारती को यह अवॉर्ड ह्यूमन राइट ऑफ कौंसिल ऑफ इंडिया और सर्व सेवा कार्य समिति की ओर से दिया गया। यह अवॉर्ड अलग-अलग क्षेत्रों में विशेष योगदान देने वालों को दिया जाता है।
उल्लेखनीय है कि महावीर भारती को मूर्तिकला के क्षेत्र में उलेखनीय कार्य करने पर पहले भी कई बार सम्मानित किया जा चुका है। भारती को अब तक जिन सम्मान से नवाजा गया है उनमें प्रमुख 'वीर दुर्गादास अवार्ड'-जोधपुर-2013, 'अभिनव सम्मान'-जयपुर-2014, 'ग्लोबल डायमण्ड अवार्ड'-करनाल (हरियाणा) 2016, 'विवेकानंद गौरव सम्मान'-जयपुर-2017 और 'ग्रेट अचीवर अवार्ड'-करनाल (हरियाणा) 2017 प्रमुख है।
इसके साथ ही महावीर जी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लालकृष्ण आडवाणी, केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह, मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल, आनन्दी बेन पटेल,ओम प्रकाश चौटाला आदि बडी राजनीतिक हस्तियों से भी सम्मानित हो चुके हैं।

सोमवार, 2 अक्तूबर 2017

टोंक में नेशनल आर्ट फेस्टिवल 27 से


टोंक में नेशनल आर्ट फेस्टिवल 27 से
मूमल नेटवर्क, जयपुर। टोकं में प्रति वर्ष होने वाला नेशनल आर्ट फेस्टिवल 27 अक्टूबर से आयोजित होगा। तीन दिन तक चलने वाले इस फेस्टिवल में भारत के प्रत्येक राज्य से कलाकारों को आमन्त्रित किया गया है। आयोजन के संयोजक हनुमान सिंह खरेडा ने जानकारी दी कि,  फेस्टिवल में श्रेष्ठ पेंटिंग व मूर्तिशिल्प पर तीन श्रेणियों में पुरस्कार दिये जाऐंगे। इन श्रेणियों को विद्यालय स्तर, स्नातक स्तर तथा स्नातकोत्तर एवं स्वतन्त्र आर्टिस्ट श्रेणी में विभाजित किया गया। श्रेष्ठ कृति को प्रथम पुरस्कार के रूप में 3100 रुपये, द्वितीय पुरस्कार के रूप में 2100 रुपये तथा तृतीय पुरस्कार के रूप में 1100 रुपये की नकद राशि से सम्मानित किया जाएगा।
इस फेस्टिवल में भाग लेने के लिए प्रतिभागियों को 1100 रुपए का रजिस्ट्रेशन शुल्क अदा करना होगा। फेस्टिवल के दौरान भोजन व आवास व्यवस्था के साथ रंग व कैनवास की व्यवस्था आयोजकों की जिम्मेदारी होगी।



रविवार, 1 अक्तूबर 2017

आज शाम होगा अनोखी संगीत समारोह

आज शाम होगा अनोखी संगीत समारोह
इंटरनेशनल डे फॉर एलडर्स पर हो रहा है आयोजन
मूमल नेटवर्क, जयपुर। देवानजानी संगीत विद्यालय आज शाम साढे छ: बजे एक अनोखी संगीत समारोह  का आयोजन कर रहा है। यह समारोह इंटरनेशनल डे फॉर एलडर्स  का जश्र मनाने के लिये आयोजित किया गयया है। जवाहर कला केंद्र के रंगायन में आयोजित इस कार्यक्रम में सुरय्या, नूरजहां, गीता दत्त, हेमंत कुमार, तलत महमूद, महेंद्र कपूर आदि वरिष्ठ गायकों के द्वारा गाये  गए गीतों को स्वर दिया जाएगा।
इन गीतों को अपनी मधुर आवाज से सजाएंगे शहर के कुछ वरिष्ठ नागरिक। शौंकिया गाने वाले इन कलाकारों की आयु 60 से 80 बरस तक की है। अपने जीवन उत्साह को गीतों के माध्यम से जीवित रखने का सराहनीय प्रयास करने वाले गायकों में नीरज शर्मा, सुमन नगर, गजेंद्र निगम, सरिता द्विवेदी, डॉ. बंदना चक्रवर्ती, रश्मी शर्मा, मुक्ता सिंघवी जैसे कई नाम शामिल हैं।
सभी कला रसिक इस कार्यक्रम में आमन्त्रित हैं।